अनुरागिनी से रणरागिनी # कथालेखन स्पर्धा(हिंदी) ती मला उमगली

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अनुरागिनी  से रणरागिणी

©® स्वामिनी चौगुले

कुलजीत सिंग खरबंदा आज अमरीका से तीन साल के बाद अपने देश आया था। ओ अमृतसर एअर पोर्टपर से बाहर निकला तो उसके माँ-बाप उसका मुस्कुराते हुए स्वागत कर रहे थे। उसने भी उनको बाहर आते ही गले लगाया। कुलजीत के पापा उसे खुशी से गले लगते हुए बोले।

पापा,“ ओय जीते कितने दोनों बाद देख रहे तुझे। कैसा हैं तू पुत्तर!” ओ उसे दोनों बाहे पकड़ कर प्यार से ताकते हुए बोले।

कुलजीत,“ मैं तो ठीक हूँ जी पापाजी आप कैसे हैं। मम्मा तू भी तो कुछ बोल। या बस ताकती ही रहेगी टुकुर टुकुर आँखों में आंसू भरकर।

मम्मा,“ जीते कितीने दिनों बाद देख रही हूँ तुझे जी भर के देख तो लेने दे। ” ओ प्यार से उसके मुख पर हाथ फेरते हुए बोली।

पापा,“ अरे घर भी चलोगी हरजीत कौरे या यही देखती रहेगी बेटे को?” ऐसा बोलकर उन्होंने ड्राइव्हर को लगेज ले जानेका इशारा किया और तीनों गाडी में बैठ गए।

कुलजीत सिंह खरबंदा छह फीट ऊँचा, गोरा-चिट्टा रंग, कमान से निकलनेवाले तीर सी सीधी नाक,सिरपर पग, आंखे काली, दाढ़ी और मुंछ, एक हात में कड़ा,जिम में पसीना बहा के कमाया हुआ शरीर एक पंजाबी गबरू जवान! अगर उसे कोई देखे तो देखता ही रह जाए। अमृतसर के पास एक गाँव में रहनेवाला।
ओ तीनो घर पहुंचे तो उसने गाड़ीसे उतरते हुए। निम्रित को पुलिसी पोशाक में घर से निकलते देखा। उसने कुलजीत को देखकर भी अनदेखा किया और ओ जाने लगी तो उसे कुलजीत के पापाने रोका और बोलने लगे।

कुलजीत के पापा,“ निम्रित बेटा इतनी सुबह सुबह कहाँ ड्यूटी लगी तुम्हारी?”

निम्रित,“ कुछ नहीं अंकल हेड कॉर्टर में मीटिंग बुलाई हैं वही जा रही थी। ओ बोलकर चली गई।

लेकिन कुलजीत उसे अचरज से ओ गाड़ी में बैठने तक देखता ही राहा।
निम्रित कौर बग्गा साडेपाच फिट उंची, गोरी,भुरी आंखे, नैन-नक्श तिखे, भरे हुए शरीर की उस पे पुलिसिया वर्दी फब रही थी और ओ उस वर्दी में रौपदार लग रही थी। कुलजीत की पडोसी और उसकी बचपन की सहेली लेकीन उसने कुलजीत को अनदेखा क्यों किया था?कुलजीत ने उसके पापा से पूछा

कुलजीत,“पापा ये निम्मी पुलिस अफसर कैसे बन गई।” उसने उनकी तरफ देखकर कहा।

मम्मा,“ अरे घर में तो चल बेटा सब बताते हैं।” ओ बोली और सब घर में चले गए।

कुलजीत के घर में रिश्तेदारों का जमावड़ा था। ओ सब उससे मिलने आए थे आखिर ओ तीन साल बाद विदेश से जो लौटा था। उससे मिलने निम्रित के पापा भी आए थे। कुलजीत ने मौका देखकर उनसे निम्रित के बारे में पूछा।

कुलजीत,“ अंकल निम्रित पुलिस अफसर बन गई मुझे तो लगा था उसने शादी की होगी! लेकीन ये कैसे हुआ?

निम्रित के पापा,“ अरे जीत तूम अमरीका चले गए। लेकिन निम्रित दो-तीन दिन तक गुमसुम रही और एक दिन मुझे आकर बोली; मैं UPSC देना चाहती हूँ। हम नें भी सोचा बच्ची कह रही हैं तो दे देने दो। वैसे भी ओ कॉलेज टॉपर हैं।पोस्ट ग्रैजुएट हो चुकी थी। ओ दो साल तक पढ़ती रही पहली बार नाकाम हुई लेकिन दूसरी बार पूरे देश में पहले सौ लोगों में सिलेक्ट हुई उसे IAS के लिए चुना गया था। हमनें भी कहा कलेक्टर बन जा लेकिन उसने IPS चुना और बन गई डेप्युटी कमिशनर!” उन्होंने पूरी जानकारी दी।

कुलजीत का दिन तो सब रिश्तेदारों से मिलने जुलने में ही बीत गया। जब हो रात दस बजे सोने गया तो उसे सायरन की आवाज सुनाई दी। उसने उसकी रूम की खिड़की से देखा तो निम्रित घर में जा रही थी। कुलजीत बेड पर लेटा लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी। उसे निम्रित का खयाल सता रहा था। कुलजीत पुरानी यादों में खो गया उसे फ़िल्म की तरह सब याद आने लगा।

कुलजीत और निम्रित के पुश्तैनी घर पास-पास थे। जाहिर हैं घर पुश्तैनी होने से दोनों परिवारों में स्नेह और अपनापन बहुत था। कुलजीत के पापा का गुड्स कॅरिअर का व्यापार था। उनके लगभग सौ ट्रक थे। निम्रित के पापा की खेती थी। लगभग पचास एकड के आसपास। कुलजीत इकलौता था। निम्रित के एक भाई था।

कुलजीत और निम्रित एक ही उम्र के इस वजह से दोनों का स्कूल एक था। दोनों की दोस्ती बहुत गहरी थी लेकिन दोस्ती प्यार में कब बदल गई उन दोनों को भी समझ में नहीं आया। दोनों की बारवी हुई तो दोनों के रास्ते अलग हो गए। कुलजीत व्हाइल्ड लाइफ फोटो ग्राफर बनना चाहता था। तो ओ फोटोग्राफी की तरफ मुड़ गया। लेकिन निम्रित का एक ही सपना था। कुलजीत से शादी करना। उसने बस घरवालों की खातिर सीनिअर कॉलेज में पढ़ने का फैसला किया। उसने आर्टस् में एडमिशन ले लिया।

दोनों का प्यार अब पूरी शबाब पर था। दोनों एक दूसरे के बिना रह नहीं सकते थे। जैसे कि दो दिल एक जान दोनों एक साथ कॉलेज जाते थे। एक साथ घूमते ज़्यादातर एक साथ रहते। दोनों के घर से भी कोई हर्ज नहीं थी क्योंकि दोनों परिवार एकदूसरे को अच्छे से जानते थे लेकिन कॉलेज खत्म होते होते। कुलजीत को निम्रित का उसे बार बार फोन करना उसके पीछे पीछे घूमना खलने लगा था। वो निम्रित को अब झटकने लगा था। लेकिन निम्रित उसके प्यार में पागल हो गई थी। ओ कुलजीत का चिढ़ना उसका उसे झिडकना नजर अंदाज करके फिर उसके सामने खड़ी हो जाती थी। कुलजीत को अब निम्रित का प्यार उसके पैरो की बेड़ी लगने लगा था। ओ उड़ना चाहता था खुले आसमान में! कॉलेज खत्म होते होते दोनों में दूरियाँ आने लगी।

कुलजीत को जंगल से प्यार था। तो निम्रित सजने सँवरने की आदी। निम्रित अब M.A करने लगी थी। हो पढाई में बहुत होशियार थी। कॉलेज में टॉपर थी लेकिन उसकी दुनिया बस कुलजीत बन गया था। कुलजीत अब ज्यादा तर घर से बाहर रहता था। ओ उसके फोटो ग्राफर दोस्तो के साथ जंगल- जंगल भटकता रहता। उसका मोबाइल भी जंगल में नेटवर्क न होने के कारण बंद रहता था।

एक बार कुलजीत महीने बाद घर आया तो निम्रित उससे मिलने उसके घर गई। कुलजीत लेपटॉप पर कुछ काम कर रहा था। निम्रित उसके पास जाकर बोली

निम्रित,“ क्या जीत इतने दिनों बाद घर आये और मुझसे मिले तक नहीं ऐसा कितने दिन चलेगा?” ओ उसके पास जाते हुए बोली।

कुलजीत,“ देखो निम्मी मुझे बहुत काम हैं ये फोटोज् मुझे नॅशनल जियोग्राफिक को भेजने हैं। इसपर मेरा पूरा करिअर टिका हैं। तो हम फिर कभी बात कर लेंगे।” ओ रुखाई से बोला

निम्रित,“ठीक हैं ” इतना ही बोली सच पूछो तो उसे कुलजीत की रुखाई खल रही थी लेकिन वो आँखें पोंछती चली गई।

उसने ये सोच कर तसल्ली कर ली कि कुलजीत काम में बिजी हैं।

निम्रित अब M.A के लास्ट इअर में थी। अब उसे लग रहा था कि उसे और कुलजीत को शादी करनी चाहिए। उसके घर में भी अब उसकी शादी की बात छिड़ने लगी थी। लेकिन कुलजीत तो अपनी दुनिया में मस्त था।
एक दिन कुलजीत को एक मेल आया और ओ खुशी से फुला नहीं समा रहा था। उसने घर में बताया

कुलजीत,“ पापा मुझे आज ही नॅशनल जियोग्राफी से मेल आया हैं। मैंने भेजे हुए फोटोज उन्हें बहुत पसंद आये हैं और उन्होंने मुझे तीन साल के लिए अफ्रीका में एक प्रोजेक्ट के लिए अपॉइंट किया हैं। आठ दिन में मुझे जाना होगा।” ओ खुशी से बता रहा था।

मम्मा,“क्या तीन साल के लिए! लेकिन बेटा निम्मो का क्या सोचा हैं तुमने?” उन्होंने चिंतित होकर पूछा

कुलजीत,“ उसके बारे में क्या सोचना!” उसने बेफिकिरी से जवाब दिया।

पापा,“ जीत निम्मी और तुम्हारा रिश्ता किसी से भी छुपा नहीं हैं। अगर तुम तीन साल के लिए जा रहे हो तो उससे शादी कर लो;थोड़े दिन उसे अपने साथ ले जाना फिर तुम्हारे आने तक रह लेगी हमारे साथ;तुम बीच बीच में आते रहना!” उन्होंने उसे समझाते हुए कहा।

कुलजीत,“ पापाजी मुझे इतनी जल्दी शादी नहीं करनी।” उसने झुँझलाकर कहा।

मम्मा,“ लेकिन निम्मी को क्या जवाब देगा तू?” उसकी तरफ देखते हुए कहा।

कुलजीत,“ मैं निम्मी से बात कर लूंगा।” उसने कहा।

जब निम्रित को ये बात पता चली तो उसने कुलजीत को पार्क में मिलने बुलाया। कुलजीत मिलने गया। निम्रित बोलने लगी।

निम्रित,“ जीत तुम अमरीका जा रहे हो? वो भी तीन साल के लिए।

कुलजीत,“ हाँ मुझे बहुत बड़ा मौका मिला हैं। जो मेरे सारे सपने पूरे करेगा।” ओ तनकर बोला

निम्रित,“ और मेरे सपनों का क्या जो तुमसे जुड़े हैं।” उसकी तरफ देखकर कहा

कुलजीत,“ निम्मी मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता।” उसने उसे बिना देखे ही कहा।

निम्रित,“ मतलब क्या हैं तुम्हारा?” उसने गुस्से से पूछा

कुलजीत,“ तुम्हें समझ नहीं आता? मुझे तुमसे शादी नहीं करनी!” उसने भी झुँझलाकर कहा

निम्रित,“ हमारा प्यार ओ वादे सब क्या था? “उसने रोते हुए कहा

कुलजीत,“ ओ गलती थी मेरी! मेरे कुछ सपने हैं। कुछ महत्वाकांक्षाएं हैं। जो तुम्हारे साथ पूरी नहीं हो सकती।

निम्रित,“ मुझसे प्यार करना तुम्हारी गलती थी?”उसने उसे देखते हुए पूछा

कुलजीत,“ हाँ! तुम्हारा और मेरा कोई मेल नहीं हैं मुझे जंगल से प्यार है मुझे वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफी में करिअर बनाना हैं। नाम कमाना हैं। लेकिन तुम्हे बस शादी करनी हैं घर बसाना हैं तुम्हारा ना अपना कोई सपना हैं ना ही मंजिल! तुम्हें शाही ही करनी हैं ना तो कोई भी चल जाएगा मेरी जगह पर। तुम लड़कियों की यही तो समझ होती हैं तुम पढ़ती भी हो तो पति अच्छा मिले इस लिए। ना कोई सपना ना कोई मंजिल! तुमसे शादी कर मुझे अपने पैरो में बेड़ी नहीं पहननी। तुम ऐसा करो कोई अच्छा लड़का देख कर शादी कर लो लेकिन मुझे बक्ष दो। तुम्हारे लिए यही अच्छा होगा।” ओ निम्रित को देखकर बोल रहा था।

ये सब अपने बारे में कुलजीत के मुंह से सुनकर निम्रित सदके में आ गई थी। वो कुछ देर चुप रही और बोलने लगी।

निम्रित,“ मैंने किसी से भी नहीं तुमसे शादी करने का सपना देखा! ओ भी आज से नहीं बल्कि बचपन से और तुमने ही ओ सपना दिखाया था। मेरे लिए क्या अच्छा और क्या बुरा ये तुम्हें मुझे सिखाने की जरूरत नहीं हैं, तुम्हें मुझसे शादी नहीं करनी; ठीक हैं।” ये सब कहकर ओ चली गई।

इंसान जब सपनों के पीछे भागता हैं तो वो अपनो को पीछे छोड़ देता हैं। वो अपने प्यारे रिश्तों का भी गला दबा देता हैं। अपनो को ठेस पहुँचाता हैं। लेकिन ये नहीं सोचता कि जब वो मंजिल तक पहुँचेगा तब उसकी खुशियाँ बँटनेवाला भी कोई नहीं होगा वो अकेला होगा। यही गलती कुलजीतने भी की थी।

आज तीन साल बाद उसके पास सब था।वह जाना-माना वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर था। उसके पास पैसा था। वो मशहूर था पर फिर भी कोई कमी थी जो उसे खल रही थी।

उसे निम्रित का दिल तोड़ने का पछतावा था। वो उससे माफी मांगना चाहता था। वो किसी कुत्ते की भौंकने की आवाज से होश में आया तो एक बज चुका था। वो सो गया लेकिन मन में कुछ ठान कर।
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दूसरे दिन वो निम्रित के घर सुबह सुबह ही चला गया। निम्रित नाश्ता कर रही थी और उसकी माँ आलू के पराठे सेंक रही थी। निम्रित ने फिर उसे अन देखा किया। उसकी माँ कुलजीत से बोली
निम्रित की माँ,“ जीत बैठ मैं गरमा गरम पराठे देती हूँ तुझे।”

कुलजीत,“ हाँ जी आंटी आपके हाथों के पराठे खाएं कई साल हो गए। वैसे निम्मी आज तुम क्या कर रही हो। उसने निम्रित की तरफ देख कर पूछा।

निम्रित,“ मैं कोई वेल्ली नहीं हूं मुझे डयूटी पर जाना हैं।” वो यह कह कर चली गई।

कुलजीत को उसकी नाराजगी और उसका उखड़ा बरताव समझ में आ रहा था। आखिर गलती तो उसी की थी।

कुलजीत उस दिन से निम्रित को मनाने की हर मुमकिन कोशिश करने लगा। कभी वो निम्रित को उस के पसंदीदा फूल भेजता तो कभी उसकी पसंदीदा मिठाई लेकिन निम्रित उसकी तरफ देखती भी न थी। एक दिन कुलजीत ने निम्रित की माँ को कह के निम्रित को किसी बहाने से अमृतसर के एक होटल में बुलाया।
निम्रित होटल पहुँची तो कुलजीत को देखकर वापस जाने लगी। कुलजीत भी उसके पीछे गया। वह होटल के बाहर गार्डन तक पहुँच गई थी। सर्दी का मौसम था और रात के आठ बज रहे थे। हवा में ठंडक थी। चारों तरफ़ फूल अपनी खुशबू बिखेर रहे थे। निम्रित भी पंजाबी सूट में खिल रही थी। वो जा ही रही थी कि कुलजीत ने उसका हाथ पकड़ लिया। निम्रितने तुरंत अपना हाथ छुड़ा लिया। कुलजीत बोलने लगा।

कुलजीत,“ मैं जानता हूँ कि मैंने तुम्हारा दिल दुखाया हैं निम्मी! लेकिन मुझे माफी मांगने का एक मौका तो दो!” उसने सिर झुकाकर कहा।

निम्रित,“माफी किस बात की? तुमने मुझे आईना दिखाकर अच्छा किया। मैं तो तुम्हारा शुक्रिया करती हूँ क्योंकि अगर तुम मेरा दिल नहीं तो तोड़ते, तो मैं आज I P S नहीं होती। तो तुम्हारा धन्यवाद! हो गया हिसाब; अब मैं चलूँ?” उसने उसे देखकर कहा।

कुलजीत,“ मुझे पता हैं कि मैंने तुम्हारा दिल तोड़ा; मैं इतना खुदगर्ज हो गया कि तुम्हारे बारे में एक बार भी नहीं सोचा मुझे माफ करना तुम्हारे लिए इतना आसान नहीं होगा लेकिन फिर भी….” वो आगे बोलता उससे पहले निम्रितने उसकी बात काटकर बोलना शुरू किया।

निम्रित,“ फिर भी मैं तुम्हे माफ कर दूँ यही ना! ठीक हैं माफ किया!” उसने गुस्से से कहा।

कुलजीत बस उसे आँसू भरी आँखों से जाते हुए देख रहा था। तभी पटाकों सी आवाज आने लगी और निम्रित तेजी से दौड़ती हुई आई और कुलजीत का हाथ पकड़ कर उसे गार्डन के एक बैंच के पीछे छिप गई। कुलजीत को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। वह बोला

कुलजीत,“ ये सब क्या हैं निम्मी?” उसने पूछा

निम्रित,“ धीरे बोलो! दो दिन पहले मैंने एक ड्रग्ज रैकेट को पकड़ा था। शायद उन्हीं के लोग मुझे मारने आये हैं। मैंने मदद के लिए हेडक्वार्टर फोन कर दिया हैं लेकिन उन्हें पहुँचने में देर लगेगी। तुम चुपचाप यही रहना तुम्हे होटल में भी नहीं भेज सकती क्योंकि होटल यहाँ से थोड़ा दूर हैं। यहाँ से मत निकलना समझे!”

वह यह कहकर धीरे धीरे दूसरे बैंच के पीछे गई और वहाँ से फायरिंग करने लगी।
निम्रित ने अकेले होते हुए भी सटीक निशाना लगाकर एक ही गन से चार हमलावरों को जख्मी किया। उसकी स्फूर्ति, उसका निशाना, उसकी सटीकता देखकर कुलजीत देखता ही रह गया। वो सोच में पड़ गया कि ये वही उसकी छुईमुई निम्मी हैं जिसे सजने सँवरने के अलावा कुछ नहीं आता था। जो पटाखे जलाने से भी डरती थी। उसने आज एक नई निम्मी को जाना था, पहचाना था जो निडर और हिम्मती थी। उसने नए सिरे से निम्रित को आज जाना और पहचाना था। कुलजीत सोचने लगा कि वो कुछ साल पहले कितना गलत था। अगर एक लड़की ठान ले तो वो क्या से क्या बन सकती हैं। बस उसके पैरो में बंधी प्यार और जिम्मेदारी की बेड़ी टूटने की देर हैं!

कुलजीत ये सब निम्रित को देखकर सोच रहा था कि निम्रित उठकर उसके पास आकर बोली

निम्रित,“ उठो अब छिपने की जरूरत नहीं हैं।”
तब तक पुलिस भी पहुंच गई। कुलजीत बाहर आ गया। निम्रित सब हमलावरों को हवालात ले गई। कुलजीत घर चला गया।

कुलजीत को समझ में आ गया था कि उसने निम्रित को हमेशा के लिए खो दिया हैं। उसे निम्रित अब कभी भी माफ नहीं करनेवाली! उसने निम्रित को समझने में गलती की थी।
अब कुलजीत निम्रित को भली भाँति हृदयंगम कर पाया था।
लेकिन उसने इसके लिए बहुत देर कर दी थी!

नारी जब तक किसी से प्यार करती हैं तब तक ओ प्यार की मूरत हैं। अगर उसे कोई अपमानित करे तो ओ कुछ भी कर सकती हैं। अगर ओ जिद पर आ जाये तो सृजन करती हैं फिर उसके जैसा कलाकार कोई नहीं और ओ अगर विनाश करना चाहे तो उसके जैसा विनाशकारी कोई नहीं!

नारी प्यार करे तो अनुरागिनी बन जाती हैं।
नारी युद्ध करे तो रणरागिनी बन जाती हैं।
नारी जीवन में आये तो संगिनी बन जाती हैं।
नारी घर में रहे तो स्वामिनी बन जाती हैं।
नारी घर से निकले तो हेमामालिनी (लक्ष्मी) बन जाती हैं।

(सदरचे लेखन कॉपी राईट या कायद्या अंतर्गत येत असून लेखकाच्या नावा शिवाय कोठेही पोस्ट करू नये . साहित्य चोरी हा कायद्याने गुन्हा आहे)

 

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नारीवादी

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