जख्म

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#जख्म
जो आपना हे बस अपना है. बाकी तो बस सपना है !
जो नही तेरे बस मे वो कडवा है !
जो अपना है वही बस मिठा है!
जो सच्चा है वही मनमे बसता है !
बाकी तो बस मच्छर बनकर डसता है..!
ये मच्छर ना खुद्द जीता है !ना औरोको जीने देता है !
पहचान करो दोस्तो इनकी !और हो जाओ दूर !
नहीतो यही वो जखम बनता है!
जो नासुर बनकर छलता है!
©पूनम पिंगळे

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कविता

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