बालदिवस

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14 नोव्हेंबर बाल दिवस
हमारा भी बचपन था।
ऊस बचपन में भी बडा अपणापन था।
जीसमे स्कूल भी थी,
पढाई भी थी।
पर…..
टेंशन क्या होता हैं,
ये बिलकुल पत्ता न था।
थक हार के, खेल कुद के,
स्कूल से घर तो आते थे।
पर फिर भी खेलणे जाते ही थे।
सोते समय पिताजी की कहानिया थी।
2से10 तक के टेबल तो रोज का नियम था।
टुशन्स तो कभी गये ही नहीं।
उलटी सिद्धी गिणती तो रोज सोते समय का होमवर्क था।
हर खेल मे हमारे साथी थे।
एकेले कैसा खेलणा ये तो आता ही नहीं था।
Sharing क्या होती है,
ये हमने ग्रुप मे सीखी।
हसणे का तो बस बहाना ही काफी था।
रोने का तो कुछ वजुद ही न था।
चाहते तो बडी बडी थी।
पर दिल छोटासा था।
बचपन तो बचपन था।
पर खुषीयो का सागर था।
आज हो गये हम बडे!
पर क्या हुआ???
सच मे बचपन कितना
अच्छा था ।
खुषीयो का खजाना था।
Happy Childrens Day
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

✒लता जुगल राठी

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कविता

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