हम जिसे गुनगुना नहीं सकते…

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हातात  काॅफीचा  मग  घेवून  सावनी  घराच्या  गॅलरीत  झोपाळ्यावर  बसली  होती.  सकाळचे  साडेसात  वाजले  होते.  माॅर्निंगवाॅक,  योगासने  वगैरे  रोजचे  सोपस्कार  पार  पाडून  फ्रेश  होऊन  तिच्या  आवडत्या  जगजीत  सिंहच्या  गझल  ऐकत  ती  निवांत  बसली  होती.  हा  सकाळचा  एवढाच  तासभर  वेळ  मिळतो  तिला  स्वत:सोबत  घालवायला.  मग  दिवसभर  मीटिंग्स,  प्रेझेंटेशनची  गडबड  चालू  असते.  ती  एका  औषधांच्या  कंपनीमध्ये  भागीदार  होती.  इतर  तीन  मित्रांसोबत  मिळून  तिने  ती  दहा  वर्षांपूर्वी  सुरू  केली  होती.  आता  व्यवस्थित  बस्तान  बसले  होते.  नवरा  त्याच्या  बिझनेससाठी  परदेशात  राहत  होता  तर  ही  इकडे  आपल्या  आवडीच्या  क्षेत्रात  खुश  होती.  मुलगी  शिक्षणासाठी  दिल्लीला  होती.  दोन  महिन्यातून  एक  आठवडा  सगळे  एकत्र  यायचे.  धमाल  करायचे  आणि  उरलेल्या  सात  आठवड्यांसाठी  एनर्जी  भरुन  घ्यायचे.  एकमेकांपासून  दूर  राहूनही  त्यांचे  बंध  घट्ट  होते.  सुखी  होती  सावनी.

मागे  जगजीत  तलम,  मखमली  आवाजात  गात  होते  तुमको  देखा  तो  यें  ख़याल  आया,  ज़िंदगी  धूप  तुम  घना  साया’… त्या  शांत  वातावरणात  ते  जादुई  शब्द  ऐकताना  सावनीला  मयंक  आठवला.  मयंक  स्वत:शीच  ते  नाव  तिने  अगदी  हळुवारपणे  उच्चारले.

किती  सुंदर  होते  ते  काॅलेजचे  दिवस  ते  दोघे  एकाच  वर्गात  होते.  तिचे  अॅडमिशन  खूप  उशीरा  झाले  होते.  तोपर्यंत  सगळ्यांनी  लॅब  पार्टनर  म्हणून  आपल्या  मित्रमैत्रिणीची  निवड  केली  होती.  ती  वाट  बघत  होती  अजून  कोणीतरी  अॅडमिशन  घ्यावी  म्हणून.  पहिले  प्रॅक्टिकल  बायोलाॅजीचं  होतं.  हातात  स्काल्पेल  घेवून  ती  स्पेसीमन  पाहत  होती.  इतक्यात  लॅबमध्ये  एक  अतिशय  देखणा  मुलगा  दाखल  झाला.  सगळे  तोच  एक  स्पेसीमन  असल्यासारखे  त्याच्याकडे  पाहू  लागले. सरांसोबत  काही  बोलून  तो  सरळ  तिच्याकडे  आला  आणि  म्हणाला,  “Hello  I  am  Mayank,  your  lab  partner.”  काय  बोलावं  ते    समजून  तिने  नुसतीच  मान  हलवली.

तो  नुकताच  राजस्थानवरून  मुंबईला  शिफ्ट  झाला  होता.  त्याच्या  वडीलांनी  इथे  सोन्याचांदीचे  दुकान  उघडले  होते.  ती  पण  इथे  नवीनच  होती.  नवीन  काॅलेज,  नवीन  वातावरणाशी  दोघेही  जुळवून  घेण्याचा  प्रयत्न  करत  होते.    महिन्यातच  दोघे  चांगले  मित्र  बनले.  आता  ते  एकत्रच  डबा  खाणे,  अभ्यास  करणे,  क्वचित  लेक्चर  बंक  करू  लागले.  त्याची  श्रीमंती,  देखणेपणा  बघून  खूप  मुली  त्याचे  लक्ष  वेधून  घेण्याचा  प्रयत्न  करत  पण  तो  तिकडे  ढुंकून  ही  पाहत  नसे.

एकेदिवशी  तो  तिला  आपल्या  घरी  घेवून  गेला.  संपन्नता  अगदी  ओसांडून  वाहत  होती  त्याच्या  घरी.  त्याने  माझी  बेस्टफ्रेंड  म्हणून  तिची  ओळख  करून  दिली.  दोघांतील  केमिस्ट्री  बघून  त्याची  आई  विचारात  पडली.  पण  बोलली  नाही  काही.

दिवस  आपल्या  वेगाने  भराभर  पुढे  सरकत  होते.  पाहता  पाहता  परिक्षा  संपल्या  आणि  सुट्टया  लागल्या.  आता  फक्त  फिरण्याचा  उद्योग  सुरू  झाला  यांचा.  एकेदिवशी  दुपारी  एका  काॅफी  शाॅपमध्ये  बसले  असताना  मागे  बॅकग्राउंडला  हेच  गाणे  वाजत  होते.  काहीतरी  सुचून  दोघांनी  एकदमच  एकमेकांकडे  पाहिले.  इतके  महिने  सोबत  घालवल्यावर  आज  त्यांच्या  लक्षात  आले  की  आपण  नकळत  एकमेकांच्या  प्रेमात  पडलोय.

सावनीला  आपल्या  घरातले  वातावरण  आठवले.  आई  वडील  तसे  चांगले  होते  पण  या  नात्याला  ते  कधीच  मान्यता  देवू  शकत  नव्हते.  कारण  दोघांमध्ये  फक्त  जातीचाच  नव्हे  तर  खूप  मोठा  आर्थिक  फरक  सुद्धा  होता.  तरीही  मयंकने  आपल्या  आईसोबत  बोलायचे  ठरवले.  आईने  साफ  शब्दात  सांगितले,   देखो  बेटा  वो  लडकी  भले  कितनी  भी  अच्छी  हो,  लेकिन  अपने  बिरादरीसे  ना  हैं,  यें  बात  ना  हों  पाएगी,  तो  बेहतर  यहीं  होगा  की  आप  उसे  भूल  जाओं”.  त्याने  सावनीला  सांगितले  चल  पळून  जावूया  तर  तिने  सरळ  नाही  म्हणून  सांगितले.  म्हणाली  जर  आपल्याला  एकत्र  रहायचे  असेल  तर  सगळयांच्या  संमतीनेच  नाही  तर  नाही.  तुम  मेरे  जिंदगीमें  एक  छांव  बनके  आये  थे  और  तुम्हारी  जगह  मेरे  दिल  में  हमेशा  रहेगी।  हमारी  शादी  नही  हुई  तो  क्या  हुआ  यादोंमें  तो  हम  हमेशा  साथ  रहेंगे  त्यांनी  तेथेच  वेगळे  होण्याचा  निर्णय  घेतला.

काॅलेज  सुरु  झाल्यावर  मयंकने  परत  राजस्थानला  जाण्याचा  निर्णय  घेतला.  यथावकाश  सावनीचेही  लग्न  झाले  आणि  ती  आपल्या  संसारात  व्यस्त  झाली.  मयंकची  आठवण  तिने  आपल्या  मनात  खोलवर  लपवून  ठेवली.  आज  अचानक  ते  सगळं  उफाळून  वर  आलं.

काॅफीचा  मग  उचलून  आत  जाता  जाता  ती  गुणगुणू  लागली,  हम  जिसे  गुनगुना  नहीं  सकते,  वक़्त  ने  ऐसा  गीत  क्यूँ  गाया’…

खरचं  प्रत्येकाच्या  मनात  एक  न  सांगितलेली लवस्टोरी  असते …

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प्रेम

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