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फिर आएगी बहार 05

शांति के जीवन में क्या फिर आएगी बहार


आयुष को परेशान देख शांति भी बेचैन हो उठी। उसने घबराते हुए पूछा,“किसका कॉल था और आप ये क्या बोल रहे हो”
आयुष ने अत्यंत मायूस होकर जवाब दिया,“शर्मा जी का कॉल था। एक्सल नेट की टीम को हमारा प्रजेंटेशन पसंद नहीं आया और उन्होंने हमारे साथ डील करने से इंकार कर दिया”
“क्या! लेकिन ये सब”
“हाँ, इतना इंपोर्टेंट प्रोजेक्ट हमारे हाथ से छूट गया और वो भी बस”
“अब मैं क्या ही बोलूँ आपको। मुझे तो इन सब की खबर ही नहीं। जो भी हुआ अब उसके बारे में ज्यादा मत सोचिए प्लीज! जल्दी से फ्रेश हो जाइए फिर कुछ खा लीजिए” शांति ने आयुष का मन बहलाते हुए कहा।
“कैसे न सोचूँ ! मैं तो सर के नजरों में पूरी तरह गिर गया।पेनड्राइव क्या भूला पूरा प्रेजेंटेशन ही खराब हो गया।इसलिए तो आज हमारा सेंटर एक्सल नेट की लिस्ट से गायब है”
“सॉरी जी! मैं भी आपकी कोई हेल्प नहीं कर पाई। वो बंटी भी कॉलेज चला गया था और कोई नजर भी नहीं आया जो आपको ईमेल कर देता या पेनड्राइव आप तक पहुँचा देता”
“सॉरी कहने से सब ठीक नहीं हो जाता शांति। पता भी है! शर्मा जी ने मुझे सर के सामने कैसे ताना मारा। उनकी वाइफ हर काम में उनका हेल्प करती है और इस प्रेजेंटेशन के लिए भी दोनों ने मेहनत की थी। दुहलानी सर उनके तारीफों के पुल बाँध रहे थे और मैं! तुम नहीं समझ पाओगी शांति! मेरे दिल पर क्या गुजरती है”
शांति से मुँह फेरते हुए आयुष कमरे की ओर चला गया।


शाम के पाँच बज रहे थे। छत पर खड़ा हुआ आयुष खुले आसमान में काले बादलों को निहार रहा था। शनिवार की शाम पूरे सप्ताह की थकान को मिटा देने वाली होती थी और मन में एक ही विचार आता कल तो सूरज देर से ही आएगा।आज इस शाम में कोई रंगीनियाँ नहीं थी बस वही सुनापन चारों ओर बिखरा हुआ था।इसी बीच निखिल के पुकारने की आवाज ने उसका ध्यान भंग किया।
“पापा!आप छत में क्या कर रहे हैं”
“कुछ नहीं बस थोड़ा टहल रहा था।आ गए स्कूल से”
निखिल आयुष की ओर बढ़ा।उसके कानों में कोच वर्मा सर की बातें गूँज उठी।
“शायद तुम नहीं जानते बेटा! तुम्हारे पापा ने बहुत कुछ सहा है और कितनी बार उन्होंने अपने सपनों को चूर-चूर होते हुए देखा है”
उसके मन में बेचैनियाँ थी आखिर वो भी तो जानना चाहता था अपने पिता का संघर्ष। वर्मा सर को इतना कुछ पता है! ये कोई साधारण बात तो नहीं होगी जो सर ने उसे माफी माँगने को भी कह दिया।किसी तरह हिम्मत जुटाते हुए वह आयुष के गले लग गया। दिनभर की मानसिक थकान को भूलकर आयुष भी उसे प्यार भरा स्पर्श दे गया।
“पापा आई एम रियली सॉरी” निखिल ने सुबकते हुए कहा।
“हम्मम।ठीक है। जाओ पढ़ाई कर लो अब” आयुष ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा। सेंटर की बातों को सोंचकर उसके मन में भी उथल पुथल मची हुई थी इसलिए वह निखिल के इस पश्चाताप को अधिक समय तक महसूस न कर सका।
“पापा आपने क्रिकेट खेलना क्यों छोड़…” इससे आगे वह कुछ भी कह पाता। आयुष का फोन बज उठा। निखिल वहीं चुपचाप खड़ा रह गया।
“दुहलानी सर! लगता है कुछ और गड़बड़ हो गई” स्क्रीन पर नाम देखकर आयुष घबराया।
“आयुष,आयुष। ए गुड न्यूज फॉर यू” दुहलानी सर की बातों में खुशी झलक रही थी।
“क्या हुआ सर! कैसी गुड न्यूज” आयुष ने आश्चर्यचकित होकर कहा।

“मेरे रिक्वेस्ट करने पर गुप्ता जी मान गए और उन्होंने हमें एक और मौका दिया है”
“मै समझा नहीं सर। उन्होंने तो हमें प्रेजेंटेशन का रिजल्ट दे ही दिया है तो फिर कैसे”

मिस्टर दुहलानी ने आयुष को विस्तारपूर्वक बताया कि उन्होंने गुप्ता जी को प्रेजेंटेशन के लिए राजी कर लिया है। आज रात नौ बजे उनकी फ्लाइट है इससे पहले उन्होंने आयुष के घर मीटिंग करने का फैसला किया है। आयुष के चेहरे पर चमक आ गई। इस बार तो वह जी जान लगा देगा। अब कोई आंधी तूफान भी उसे नहीं रोक पाएगा।यही सोचकर उसने उत्साहित होते हुए कहा,”मैं इस बार हमारे सेंटर का नाम डूबने नहीं दूँगा सर। इस बार तो हमारा सिलेक्शन होना ही है।वैसे आप भी तो रहेंगे न मेरी हिम्मत बनकर”
“हाँ, हाँ क्यों नहीं!ऐसा ही होगा” मिस्टर दुहलानी ने उसे हिम्मत देते हुए कहा।

“मैं इस बार कोई भी रिस्क नहीं उठाना चाहता सर। मुझे क्या- क्या तैयारी करनी होगी कि सब कुछ एकदम परफेट हो”
“बस कॉफिडेंस के साथ तैयार रहना फिर तो कोई भी मिस्टेक नहीं। अरे! हाँ गुप्ता जी की फर्माइश थी कि आज का डिनर तुम्हारे घर पर हो। कह रहे थे रेस्टोरेंट के खाने से उनका मन ऊब गया है”
“स्योर सर,ये तो बहुत अच्छी बात है इसी बहाने आपकी सेवा का भी मौका मिल जाएगा”
आयुष की आँखों में चमक आ गई और मन उमंगों से भर गया।वह चहकते हुए निखिल के साथ नीचे गया।

“मम्मी, मम्मी आज खाने में क्या बनेगा” निखिल ने शांति को आवाज लगाते हुए कहा।
“शांति, कहाँ हो तुम” आयुष ने भी इधर उधर देखते हुए उसे पुकारा।
हॉल में शांति की कोई झलक न पाकर आयुष रसोईघर की ओर गया किंतु वो वहाँ भी गायब थी। शांति की तलाश में निखिल अब कमरे की ओर गया।
…………………………..
मोतीनगर के बाजार में समीर सब्जियों की खरीददारी कर रहा था। लोगों की भीड़- भाड़ और आवाजाही लगी हुई थी।
“टमाटर कैसे दिए भैया” समीर ने सब्जीवाले से पूछा।
“तीस रुपए किलो भैया जी” सब्जी वाले ने उत्तर दिया।
इसी बीच समीर का फोन बजा। स्क्रीन पर दुहलानी सर का नाम देख उसने झट से फोन अपने कानों पर टिका दिया और उसने इशारे में ही दो किलो टमाटर तौलने का अनुरोध किया। मिस्टर दुहलानी ने समीर को सारा हाल सुनाते हुए आयुष के घर चलने का आग्रह किया। पुनः प्रेजेंटेशन के बारे में सुनकर समीर को आश्चर्य हुआ और उसने तपाक से कहा,”गुप्ता सर ने मित्तल के घर मीटिंग फिक्स कर दिया मुझे तो यकीन नहीं हो रहा।और ये क्या! डिनर के लिए कम से कम कोई होटल बुक कर लेते सर”
मिस्टर दुहलानी बोले,“मैंने बस उन्हें प्रेजेंटेशन के लिए राजी किया है।ये प्लेस और डिनर का आइडिया उनका ही है।आयुष के घर क्या दिक्कत ही क्या है! मुझे लगता है गुप्ता जी ने कुछ सोंच समझकर ही ये डिसीजन लिया होगा”
मिस्टर दुहलानी का जवाब सुनकर समीर विचलित हो गया।उसके मन में प्रश्न उभर कर आने लगे। गुप्ता सर तो आज बड़ी जल्दबाजी में दिखाई पड़ रहे थे तो फिर उन्होंने इस प्रेजेंटेशन के लिए कैसे मन बना लिया।क्या वाकई में वो आयुष का प्रेजेंटेशन पूरा देखना चाहते हैं।अजीब बात है!आज तक तो दुहलानी सर कभी उसके घर नहीं आए और आज आयुष के घर खाने के लिए भी तैयार हो गए।इस समय उसे कुछ भी समझ नहीं आया और उसने व्यस्तता का बहाना बनाते हुए मीटिंग के लिए साफ इंकार कर दिया। भले ही वह आई.सी.आई कम्प्यूटर सेंटर की कामयाबी चाहता है लेकिन इसका श्रेय किसी और को मिल जाए ये भी तो उसे रास नहीं आया। उसने भी उम्मीदें लगाई थी कि एक्सल नेट एजुकेशन के लिए उनका सेंटर चुना जाए। किंतु इस प्रकार दुहलानी सर का आयुष के प्रति लगाव देख वह कुंठा से भर गया।अपना उतरा हुआ चेहरा लेकर उसने शेष खरीदारी की और घर चला गया।