भाग-06
आयुष ने शांति को आँगन में खोजा परंतु वह वहाँ भी मौजूद नहीं थी। इसी बीच कमरे की ओर से निखिल के चिल्लाने की आवाज आई। वह हड़बड़ाता हुआ कमरे की ओर गया।
“क्या हुआ निखिल, तुम चिल्लाए क्यों”
“पापा, मम्मी को तो”
“हाँ क्या हुआ। बताओ तो” आयुष ने घबराते हुए कहा।
शांति बिस्तर पर लेटी हुई थी। आयुष ने उसके माथे को स्पर्श किया। उसका पूरा बदन ठंडा था और वह दर्द से कराह रही थी।
“शांति, शांति ये कैसे हुआ? तुम तो काँप रही हो”
आयुष ने शांति को चादर ओढ़ाते हुए कहा।
“हम्मम,मेरे सिर में दर्द…. मुझे माफ कर दीजिए आयुष जी” शांति ने बड़बड़ाते हुए कहा।
“डोंट वरी शांति,सब ठीक हो जाएगा हम डॉक्टर पास जाएँगे अभी। निखिल बेटा तुम सरसों तेल से मम्मी के पैरों की मालिश करो” आयुष वही बिस्तर पर बैठ गया।
“शांति, धीरे-धीरे उठने की कोशिश करो।हमें अभी डॉक्टर के पास जाना चाहिए ” आयुष ने शांति के माथे पर हाथ फेरते हुए कहा।
“नह्ह्ही, मैं नहीं जा सकती जी” शांति ने धीमे स्वर में कहा।
“डोंट वरी शांति, मैने बंटी को बोल दिया है हम उसके कार में जाएँगे” आयुष ने बड़े प्यार से उसके हाथ को स्पर्श किया।
“हाँ पापा, आप जल्दी से मम्मी को डॉक्टर के पास ले जाइए न” निखिल ने भावुक होते हुए कहा।
आयुष ने शांति को सहारा देते हुए उठाने का प्रयास किया और इसी बीच उसका फोन बजा। शांति दीवार के सहारे बैठी रही।
“हेलो सर”आयुष ने बुझी हुई आवाज में कहा।
“आयुष हम तुम्हारे घर वाले गली में ही पहुँच गए हैं वहाँ सब कुछ रेडी है न”
“हाँ सर लेकिन वो अभी”
“ठीक है आयुष,तुम दरवाजे के बाहर ही रहना फिर” इतना कहते हुए मिस्टर दुहलानी ने फोन रख दिया।
आयुष के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई। शांति की हालत देख वह पहले ही बेचैन था और अब मीटिंग के बारे में सोचकर उसकी धड़कनें तेज हो गई।
“आयुष भैया, कार ले आया हूँ चलें अब” दरवाजे पर बंटी आवाज लगा रहा था।
“हाँ बंटी,रूको जरा” आयुष ने वहीं से उसे जवाब दिया।
“किसका कॉल था जी,कौन आ रहा है अभी” शांति ने लड़खड़ाती हुई जुबान से कहा।
“वो दुहलानी सर और गुप्ता सर ने हमारे घर में अर्जेंट मीटिंग रखा है। वो पहुँचने ही वाले हैं मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा” आयुष ने परेशान होते हुए कहा।
शांति बोली,“आप मीटिंग अटेंड कर लीजिए प्लीज! घर में दवाई रखी है उसे खाकर मैं रेस्ट कर लूँगी”
“नहीं शांति! डॉक्टर पास जाना ज्यादा जरूरी है। वापिस आने तक निखिल घर संभाल लेगा। मैं सर को अभी बता कर मीटिंग कैंसिल कर देता हूँ”
“नह्ह्ही जी…वो पहुँच गए हैं बहुत नाराज होंगे”
“चलो तो शांति बंटी दरवाजे पर ही खड़ा है। निखिल बेटा! तुम अपना ख्याल रखना हम जल्दी ही आते हैं” शांति को सहारा देते हुए वह उसे बंटी के कार तक ले आया। उन्नीस वर्ष का एक दुबला पतला नवयुवक बंटी बाहर उनकी राह ताक रहा था।
“जल्दी से आस्था क्लिनिक ले चलो बंटी” कार में शांति के साथ बैठते हुए आयुष ने कहा।
शांति ने आयुष से आग्रह किया कि वह अपनी मीटिंग को नजरंदाज न करे और दुहलानी सर का अच्छे से स्वागत करे। आयुष ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में वो कुछ नहीं कर पाएगा। अगर उसे पहले पता होता तो इस मीटिंग के लिए वह कभी राजी नहीं होता। शांति भी अपनी जिद पर अड़ी रही और उसने बंटी के साथ अकेले ही डॉक्टर पास जाने का निर्णय कर लिया।बंटी ने आयुष को विश्वास दिलाते हुए कहा कि वह शांति को सावधानी से डॉक्टर पास ले जाएगा।आयुष ने बेमन से हाँ में सिर हिलाया और निखिल के साथ बाहर ही खड़ा रहा।
“नहीं शांति! डॉक्टर पास जाना ज्यादा जरूरी है। वापिस आने तक निखिल घर संभाल लेगा। मैं सर को अभी बता कर मीटिंग कैंसिल कर देता हूँ”
“नह्ह्ही जी…वो पहुँच गए हैं बहुत नाराज होंगे”
“चलो तो शांति बंटी दरवाजे पर ही खड़ा है। निखिल बेटा! तुम अपना ख्याल रखना हम जल्दी ही आते हैं” शांति को सहारा देते हुए वह उसे बंटी के कार तक ले आया। उन्नीस वर्ष का एक दुबला पतला नवयुवक बंटी बाहर उनकी राह ताक रहा था।
“जल्दी से आस्था क्लिनिक ले चलो बंटी” कार में शांति के साथ बैठते हुए आयुष ने कहा।
शांति ने आयुष से आग्रह किया कि वह अपनी मीटिंग को नजरंदाज न करे और दुहलानी सर का अच्छे से स्वागत करे। आयुष ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में वो कुछ नहीं कर पाएगा। अगर उसे पहले पता होता तो इस मीटिंग के लिए वह कभी राजी नहीं होता। शांति भी अपनी जिद पर अड़ी रही और उसने बंटी के साथ अकेले ही डॉक्टर पास जाने का निर्णय कर लिया।बंटी ने आयुष को विश्वास दिलाते हुए कहा कि वह शांति को सावधानी से डॉक्टर पास ले जाएगा।आयुष ने बेमन से हाँ में सिर हिलाया और निखिल के साथ बाहर ही खड़ा रहा।
सफेद रंग की चमचमाती कार से मिस्टर दुहलानी और मिस्टर गुप्ता उतरे।
“गुड इवनिंग सर! आइए अंदर आइए” आयुष ने उनका अभिवादन किया।
“गुड इवनिंग। बात ये है मिस्टर मित्तल मैं दुहलानी जी की बातों को टाल नहीं सका इसलिए यहाँ तक आया हूँ” मिस्टर गुप्ता ने अंदर प्रवेश करते हुए कहा।
“ क्या हुआ आयुष! तुम्हारा चेहरा क्यों उतरा हुआ है” मिस्टर दुहलानी ने आयुष से कहा।
आयुष ने उन्हें शांति की तबियत का सारा हाल सुनाया।निखिल ने भी उनका अभिवादन किया और रसोईघर की ओर गया।उसने स्वयं से अपनी समझ के अनुसार चाय नाश्ते का प्रबंध भी कर लिया।
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“गुड इवनिंग सर! आइए अंदर आइए” आयुष ने उनका अभिवादन किया।
“गुड इवनिंग। बात ये है मिस्टर मित्तल मैं दुहलानी जी की बातों को टाल नहीं सका इसलिए यहाँ तक आया हूँ” मिस्टर गुप्ता ने अंदर प्रवेश करते हुए कहा।
“ क्या हुआ आयुष! तुम्हारा चेहरा क्यों उतरा हुआ है” मिस्टर दुहलानी ने आयुष से कहा।
आयुष ने उन्हें शांति की तबियत का सारा हाल सुनाया।निखिल ने भी उनका अभिवादन किया और रसोईघर की ओर गया।उसने स्वयं से अपनी समझ के अनुसार चाय नाश्ते का प्रबंध भी कर लिया।
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सड़क पर लोगों की भीड़भाड़ चरम पर थी। मोटर गाड़ियों की खचाखच भीड़ के बीच ही बंटी की कार अचानक रुक गई।
“कक्कया…हुआ बंटी” दर्द में बेचैन शांति ने पूछा।
“पता नहीं भाभी,इसको भी अभी बंद होना था। मैं देखता हूँ” कार से उतरते हुए बंटी ने कहा।
कार का टायर पंक्चर देख उसके होश उड़ गए। आस्था क्लिनिक पहुँचने में अभी तीन किलोमीटर शेष था। कार के अंदर शांति बेसुध होने लगी थी। उसे देख बंटी ने हिम्मत देते हुए कहा, “मैं किसी से हेल्प माँगता हूँ भाभी जी, डोंट वरी”
सामने से आती हुई एक कार को उसने रुकवाया। काले रंग की कार से उतरा हुआ शख्स और कोई नहीं बल्कि समीर शर्मा था। बाजार से लौटता हुआ समीर वैसे तो बड़ी जल्दबाजी में था किंतु सामने से किसी को मदद माँगते देख वह फौरन रुक गया।
“अरे! भाभी जी आप।आपको इस हालत में छोड़कर
मित्तल जी कहाँ हैं” शांति को बंटी के साथ देख समीर आश्चर्यचकित रह गया।
“शर्मा जी वो आज मीटिंग” इतना कहते ही वह बेसुध होने लगी।
“कक्कया…हुआ बंटी” दर्द में बेचैन शांति ने पूछा।
“पता नहीं भाभी,इसको भी अभी बंद होना था। मैं देखता हूँ” कार से उतरते हुए बंटी ने कहा।
कार का टायर पंक्चर देख उसके होश उड़ गए। आस्था क्लिनिक पहुँचने में अभी तीन किलोमीटर शेष था। कार के अंदर शांति बेसुध होने लगी थी। उसे देख बंटी ने हिम्मत देते हुए कहा, “मैं किसी से हेल्प माँगता हूँ भाभी जी, डोंट वरी”
सामने से आती हुई एक कार को उसने रुकवाया। काले रंग की कार से उतरा हुआ शख्स और कोई नहीं बल्कि समीर शर्मा था। बाजार से लौटता हुआ समीर वैसे तो बड़ी जल्दबाजी में था किंतु सामने से किसी को मदद माँगते देख वह फौरन रुक गया।
“अरे! भाभी जी आप।आपको इस हालत में छोड़कर
मित्तल जी कहाँ हैं” शांति को बंटी के साथ देख समीर आश्चर्यचकित रह गया।
“शर्मा जी वो आज मीटिंग” इतना कहते ही वह बेसुध होने लगी।
समीर बोला,“ठीक है ठीक है। बाद में बाद में बात कर लेंगे। आप आराम से बैठ जाइए”
बंटी ने उसे सारा हाल सुनाते हुए उससे क्लिनिक जाने का निवेदन किया और अपनी कार वहीं छोड़ गया। समीर ने जोरों से पहिया घुमाया और कुछ ही देर में वे आस्था क्लिनिक पहुँच गए।डॉक्टर कपूर के आस्था क्लिनिक पर लोगों की आवाजाही लगी हुई थी। समीर ने अपना कार पार्किंग पर लगाया। शांति को सहारा देते हुए बंटी उसे अंदर ले गया। डॉक्टर की जाँच पड़ताल के बाद उसका इलाज शुरू हुआ।
केबिन के बाहर खड़ा हुआ समीर केवल आयुष के बारे में ही सोच रहा था। एक्सल नेट की मीटिंग के लिए आयुष ने तो पूरी तैयारी कर ही ली होगी। कहीं गुप्ता सर को उसका प्रेजेंटेशन पसंद आ गया तो! आयुष को इस समय अपनी पत्नी के साथ होना चाहिए था उसके लिए ये मीटिंग बढ़कर हो गया।
बंटी ने उसे सारा हाल सुनाते हुए उससे क्लिनिक जाने का निवेदन किया और अपनी कार वहीं छोड़ गया। समीर ने जोरों से पहिया घुमाया और कुछ ही देर में वे आस्था क्लिनिक पहुँच गए।डॉक्टर कपूर के आस्था क्लिनिक पर लोगों की आवाजाही लगी हुई थी। समीर ने अपना कार पार्किंग पर लगाया। शांति को सहारा देते हुए बंटी उसे अंदर ले गया। डॉक्टर की जाँच पड़ताल के बाद उसका इलाज शुरू हुआ।
केबिन के बाहर खड़ा हुआ समीर केवल आयुष के बारे में ही सोच रहा था। एक्सल नेट की मीटिंग के लिए आयुष ने तो पूरी तैयारी कर ही ली होगी। कहीं गुप्ता सर को उसका प्रेजेंटेशन पसंद आ गया तो! आयुष को इस समय अपनी पत्नी के साथ होना चाहिए था उसके लिए ये मीटिंग बढ़कर हो गया।
“शर्मा जी, थैंक यू सो मैच। आपने टाइम पर हमें हॉस्पिटल पहुँचा दिया” बंटी ने समीर से कहा।
“अरे!कोई बात नहीं भाई। ये तो मेरा फर्ज था वैसे मित्तल जी तो मेरे अपने ही हैं। क्या हुआ अगर वो इतने बिजी हैं तो। तुम जैसे उनकी हेल्प कर रहे हो समझो मैंने भी वही किया” समीर ने आयुष पर तंज कसते हुए कहा। कुछ देर निगरानी के बाद वह अपने घर चला गया।।
“अरे!कोई बात नहीं भाई। ये तो मेरा फर्ज था वैसे मित्तल जी तो मेरे अपने ही हैं। क्या हुआ अगर वो इतने बिजी हैं तो। तुम जैसे उनकी हेल्प कर रहे हो समझो मैंने भी वही किया” समीर ने आयुष पर तंज कसते हुए कहा। कुछ देर निगरानी के बाद वह अपने घर चला गया।।
क्रमशः……..
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