क्रिसमस गिफ्ट
सुबह 5:00 बजे के अलार्म से रूपा की नींद खुल गई ।
जाड़े की सुबह, वैसे तो बिस्तर छोड़ने का मन ही नहीं करता, पर तभी, जब सब कुछ मनमाफिक चल रहा हो।
मन की चिंताओं ने उसे बिस्तर से उठने को विवश कर दिया।
रूपा ने चाय बनाकर रोहन की चाय ढ़क कर रख दी और अपना कप लिए वह पढ़ने बैठ गई।
मन की चिंताओं ने उसे बिस्तर से उठने को विवश कर दिया।
रूपा ने चाय बनाकर रोहन की चाय ढ़क कर रख दी और अपना कप लिए वह पढ़ने बैठ गई।
रोहन रात देर से सोते हैं तो सुबह वह उन्हें नहीं जगाती थी। क्या करना है, जल्दी उठ कर भी जब तक नींद में है, चिंताओं से परे हैं। बाद में तो काम की तलाश में लगे रहते हैं। अच्छी भली नौकरी थी, पर जबान की तेजी ने सब कुछ छीन लिया।
नौकरी में बॉस की दादागिरी थोड़ी बहुत तो सहनी ही पड़ती है। पर खैर, जब कंपनी में छ़टनी शुरू हुई रोहन का नंबर पहले आ गया।
नौकरी में बॉस की दादागिरी थोड़ी बहुत तो सहनी ही पड़ती है। पर खैर, जब कंपनी में छ़टनी शुरू हुई रोहन का नंबर पहले आ गया।
अब रुपा और रोहन दोनों मिलकर कोचिंग स्कूल खोलना चाहते हैं। उनके पास कई स्टूडेंट पढ़ने आते हैं। रोहन कुछ स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं।
घर में यह व्यवस्था करना मुश्किल है। एक जगह उन्होंने देख रखी है, पर बात पैसों पर आकर अटक जाती हैं; क्या करें समझ में नहीं आ रहा।
रोहन ने उसे पढ़ते हुए देखा तो बोले 'अरे आज भी क्लास है क्या?'
'क्यों नहीं........?'
'अरे आज 24 तारीख है ना कल क्रिसमस है, तो क्लास को छुट्टी नहीं होगी?'
'क्या....... अरे हां!!.... वह तो भूल ही गई थी मैं।'
क्रिसमस का नाम सुनते ही उसके कानों में क्रिसमस के कैरोल और घंटियों की आवाज गूंजने लगी.
अपने बचपन में उसके कॉलोनी में अनेक ईसाई परिवार रहते थे। स्कूल मे क्रिसमस की छुट्टियां लगने से पहले ही क्रिसमस की तैयारियां शुरू हो जाती थी। क्रिसमस का ट्री सज जाता था।
घर में पापा क्रिसमस ट्री सजाते थे। मम्मी केक बनाती थी, रात में सांता क्लॉस बनकर पापा उसके तकिए के नीचे चुपके से उसके लिए गिफ्ट रख देते थे। सुबह वह तकिया उठा कर अपना गिफ्ट देखती तो बहुत खुश हो जाती।
साल दर साल यही सिलसिला चला। पोस्ट ग्रेजुएशन होते ही, जब उसकी शादी की बात चली तब उसने मम्मी से साफ कह दिया उसे अभी शादी नहीं करनी है, तो क्यों लड़का देखने की जल्दी है?।
वह रात भी क्रिसमस की रात थी, सुबह उठी और तकिए के नीचे हाथ डाला तो एक लिफाफा उसके हाथ आया , देखा उसमें एक तस्वीर थी।वह एक सुदर्शन व्यक्तित्व वाले युवक की तस्वीर थी। काली गहरी बोलती आंखें, वह एकटक तस्वीर देखती रही।
तभी उसे किसी की आहट सुनाई दि तो तस्वीर जल्दी से लिफाफे में डाल वह उठ गई।
घर में यह व्यवस्था करना मुश्किल है। एक जगह उन्होंने देख रखी है, पर बात पैसों पर आकर अटक जाती हैं; क्या करें समझ में नहीं आ रहा।
रोहन ने उसे पढ़ते हुए देखा तो बोले 'अरे आज भी क्लास है क्या?'
'क्यों नहीं........?'
'अरे आज 24 तारीख है ना कल क्रिसमस है, तो क्लास को छुट्टी नहीं होगी?'
'क्या....... अरे हां!!.... वह तो भूल ही गई थी मैं।'
क्रिसमस का नाम सुनते ही उसके कानों में क्रिसमस के कैरोल और घंटियों की आवाज गूंजने लगी.
अपने बचपन में उसके कॉलोनी में अनेक ईसाई परिवार रहते थे। स्कूल मे क्रिसमस की छुट्टियां लगने से पहले ही क्रिसमस की तैयारियां शुरू हो जाती थी। क्रिसमस का ट्री सज जाता था।
घर में पापा क्रिसमस ट्री सजाते थे। मम्मी केक बनाती थी, रात में सांता क्लॉस बनकर पापा उसके तकिए के नीचे चुपके से उसके लिए गिफ्ट रख देते थे। सुबह वह तकिया उठा कर अपना गिफ्ट देखती तो बहुत खुश हो जाती।
साल दर साल यही सिलसिला चला। पोस्ट ग्रेजुएशन होते ही, जब उसकी शादी की बात चली तब उसने मम्मी से साफ कह दिया उसे अभी शादी नहीं करनी है, तो क्यों लड़का देखने की जल्दी है?।
वह रात भी क्रिसमस की रात थी, सुबह उठी और तकिए के नीचे हाथ डाला तो एक लिफाफा उसके हाथ आया , देखा उसमें एक तस्वीर थी।वह एक सुदर्शन व्यक्तित्व वाले युवक की तस्वीर थी। काली गहरी बोलती आंखें, वह एकटक तस्वीर देखती रही।
तभी उसे किसी की आहट सुनाई दि तो तस्वीर जल्दी से लिफाफे में डाल वह उठ गई।
दिन में दो-तीन बार उसने तस्वीर देखी। नाम भी पढ़ा। रात को सोने गई तब उसने तकिए के नीचे देखा लिफाफा गायब था। उसने पूरा बिस्तर देख डाला, उसे यह करते देख मां ने पूछा,
'क्या ढूंढ रही हो?'
वह सकपका गई, 'वो-- यहां लिफाफा----।'
'अब तुम्हें शादी तो करनी नहीं है, फिर क्या करना है देख कर?' .
....पापा ने हंसते हुए पूछा।
'क्रिसमस गिफ्ट पसंद है ना?'
शरमाते हुए रूपा पापा के गले लग गई।
'क्या ढूंढ रही हो?'
वह सकपका गई, 'वो-- यहां लिफाफा----।'
'अब तुम्हें शादी तो करनी नहीं है, फिर क्या करना है देख कर?' .
....पापा ने हंसते हुए पूछा।
'क्रिसमस गिफ्ट पसंद है ना?'
शरमाते हुए रूपा पापा के गले लग गई।
आज भी क्रिसमस का दिन ही है; पर अब पापा नहीं हैं। उसकी आंखें बरसने लगीं...... पापा मम्मी को याद कर।
आज अगर पापा होते तो इस मुश्किल घड़ी में वे जरूर उसकी हिम्मत बढ़ाते ।
रात में सोते समय उसे रह रह कर पापा मम्मी की याद आ रही थी। उसकी शादी के बाद वे दोनों वैष्णो देवी मन्नत पूरी करने गए थे। वापसी में मौसम खराब हो गया। बस का ब्रेक अचानक फेल हो गया, ड्राइवर समझ नहीं पाया और पूरी बस खाई में गिर गई। एक भी यात्री नहीं बचा।
एक ही पल में उसका मायका, उसका बचपन सब उससे छिन गया।
आज अगर पापा होते तो इस मुश्किल घड़ी में वे जरूर उसकी हिम्मत बढ़ाते ।
रात में सोते समय उसे रह रह कर पापा मम्मी की याद आ रही थी। उसकी शादी के बाद वे दोनों वैष्णो देवी मन्नत पूरी करने गए थे। वापसी में मौसम खराब हो गया। बस का ब्रेक अचानक फेल हो गया, ड्राइवर समझ नहीं पाया और पूरी बस खाई में गिर गई। एक भी यात्री नहीं बचा।
एक ही पल में उसका मायका, उसका बचपन सब उससे छिन गया।
सपने में भी उसे पापा नजर आ रहे थे सांता क्लॉस के ड्रेस पहने कह रहे थे.......
' देख सरप्राइस गिफ्ट लाया हूंँ, तेरी पसंद का....' ...... और धीरे से तकिए के नीचे रख दिया।
' देख सरप्राइस गिफ्ट लाया हूंँ, तेरी पसंद का....' ...... और धीरे से तकिए के नीचे रख दिया।
सुबह रूपा की नींद खुली तो देखा 8:00 बज गए थे, रोहन चाय का कप लिए खड़े हैं।
'अरे मुझे जगाया क्यों नहीं?'
'हैप्पी क्रिसमस....'कहते हुए रोहन ने उसे चाय का कप थमाया।
चाय पीकर रूपा बिस्तर ठीक करने लगी देखा तकिए के नीचे लिफाफा रखा है ,तभी उसे रात का सपना याद आया।
लिफाफा लिए वह रोहन के पास गई , 'रोहन यह लिफाफा?'
'अरे हां, मैं तुम्हें बताना ही भूल गया था कल ही कुरियर से आया। लिफाफे में पापा के एलआईसी के पेपर रखे थे, जिसमें उनके बाद मां और रूपा को नॉमिनी किया था। उस पालिसी के मुआवजे से इतनी रकम मिल गई कि वह कोचिंग क्लास खोल सके ।
रुपा की आंखों से आंसू बहने लगे रात का सपना सच था। आज भी पापा, इस दुनियां में न होते हुए भी, सांता क्लॉज बन कर उसके लिए गिफ्ट देकर गए थे ............।
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'अरे मुझे जगाया क्यों नहीं?'
'हैप्पी क्रिसमस....'कहते हुए रोहन ने उसे चाय का कप थमाया।
चाय पीकर रूपा बिस्तर ठीक करने लगी देखा तकिए के नीचे लिफाफा रखा है ,तभी उसे रात का सपना याद आया।
लिफाफा लिए वह रोहन के पास गई , 'रोहन यह लिफाफा?'
'अरे हां, मैं तुम्हें बताना ही भूल गया था कल ही कुरियर से आया। लिफाफे में पापा के एलआईसी के पेपर रखे थे, जिसमें उनके बाद मां और रूपा को नॉमिनी किया था। उस पालिसी के मुआवजे से इतनी रकम मिल गई कि वह कोचिंग क्लास खोल सके ।
रुपा की आंखों से आंसू बहने लगे रात का सपना सच था। आज भी पापा, इस दुनियां में न होते हुए भी, सांता क्लॉज बन कर उसके लिए गिफ्ट देकर गए थे ............।
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लेखिका---प्रतिभा परांजपे
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