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रक्तपिशाच का रक्तमणि १

एक रहस्यमय प्रेमकथा जिसमे नरपिशाच और मानव कन्या की प्रेम कहानी छुपी हुई है।

भाग १


उत्तराखंड राज्य के पहाड़ों में स्थित खिरसु गाँव, स्वर्ग के रूप जैसा सुंदर था। शांत वातावरण, घने जंगल, और निरंतर शीतल कोहरे गाँव को एक रहस्यमय आकर्षण दे रहे थे। गाँव जो समुद्र तल से २२८६ मीटर ऊपर था, जहा सूरज की रोशनी केवल कुछ ही क्षणों के लिए दिखाई देती थी, कोहरा जो गाँव पर एक रहस्यमय छाया की मोटी परत बनाकर रखता था ।

यहां पहुंचने के लिए, "नटवर " गाँव से चार घंटे की दूरी पर उपर चढ़कर जाना पडता था , इसलिए खिरसु एक दुर्गम और बाकी गांवो से दूर -दूर था। इस गाँव में कुछ ही लोग रह रहे थे, और क्योंकि यह दुर्गम था, यहां आने में बहुत मेहनत करनी पड़ती थी और यही कारण था कि पर्यटक यहां नही आना चाहते थे और इसी रहस्यमय माहौल ने राजवीर को यहां आने के लिए खींच लिया था।

राजवीर, एक नरपिशाच्च, यानी, वेम्पायर, जो पिछले ३००० वर्षों से एकांत में रह रहा था। उसका पूरा जीवन अमरता के अभिशाप द्वारा दुःखित हो चुका था। वह प्राचीन काल में एक योद्धा हुआ करता था, जो कई युद्धों का भाग रह चूका था, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने उसके मानव जीवन को समाप्त कर दिया और उसे ये शापित जीवन जीने की विरासत मिल गई। उसे जीवित रहने के लिए ताजा ताजा खून पीना पड़ता था, लेकिन इस अमरता के साथ , वह खुश नहीं था। वह जीवित था, लेकिन वह वास्तव में जी नहीं रहा था। उसे जीवन में उबासी आने लगी थी, अब मौत नहीं आती इसलिए वह जिए जा रहा था।

राजवीर एक ऊँचा चौड़े कदवाला और आकर्षक व्यक्तित्व वाला एक युवा व्यक्ति था, जिसकी उम्र ३० वर्ष के आसपास दिखाई देती थी, लेकिन उसकी आँखों में सालोंसे गंभीरता और दर्द देखा जा सकता था। उसके काले काले बाल हल्के समुन्दर के तरंगों की तरह थे, जो उसके चेहरे की तीव्र संरचना को पूरक करते थे। उसकी त्वचा का रंग एक हल्के और लगभग सफेद संगमरमर की तरह था, जिसने उसे एक रहस्यमय रूप देकर रखा था। उसकी लाल-भूरे रंग की आंखों में एक आकर्षक लेकिन रहस्यमय चमक थी, जैसे कि उन आँखों ने हजारों कहानियाँ देखी होंगी। उसका पूरा अवतार एक ही समय में शक्तिशाली, रहस्यमय और आकर्षक लगता था।

खिरसु के रहस्यमय माहौल ने उसे यहाँ आकर्षित किया था। गाँव की शांत और दुर्गम जगह उसके लिए एकदम सही थी, सूरज की रोशनी यहां नहीं पहुंचती थी। और इसलिए यह उसके लिए सही जगह थी, सूरजकी किरने उसकी त्वचा को जला देती थी, इसलिए जब भी बाहर सूरज की रोशनी हो उस वक्त वह घरसे बाहर नहीं निकलता था। खिरसु के घने जंगल में, उसने एक पुराने और निर्जन घर में अपना नया आश्रय बनाया हुआ था। वह इस घर में बैठकर पुरे गाँव के क्षेत्र को देख सकता था, लेकिन वह गांव के ग्रामीणों के साथ कभी संपर्क बनाने की कोशिश नहीं करता था।जंगल के जानवरो का शिकार करके, वह अपने रक्त की प्यास को भी संतुष्ट कर सकता था।

खिरसू के उस कोहरे में एक तेजस्वी जीव और रहता था, "आर्या"। आर्या एक २२ वर्षीय, सरल लेकिन सुंदर और दयालु लड़की थी। उसकी आँखें एक अलग ब्रह्मांड की कहानी बताती थीं। वह गाँव में रहने वाले लोगों के लिए एक सहायक के रूप में आई थी; वह आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन करती थी, जंगल में घूमती और जड़ी -बूटियों को इकट्ठा करती थी, बीमारों की सेवा करती थी। उसका स्वभाव इस तरह का था कि जो कोई भी उससे मिलता वह उसकी मुस्कान से घायल हो जाता था।

राजवीर ने पहली बार आर्याको गाँव के चौराहे पर देखा। वह एक कोहरे भरे माहौल में किसी ग्रामीण से बात कर रही थी, उसके चेहरे पर एक खुशहाल मुस्कान थी, और उसका सरल लेकिन उज्ज्वल अस्तित्व एक पल के लिए राजवीर दंग रह गया। तीन हजार साल के एकाकी जीवन में, पहली बार उसे कुछ महसूस हुआ, जैसे समय रुक गया है, और उसके जीवन में एक नया जीवन जीने के लिए सपना जागृत हो रहा है।

जब वह फूलों से भरी टोकरी उठा रही थी, तो उसके हल्के हावभाव और एक शानदार व्यक्तित्व ने राजवीर को मोहित कर दिया था । उसकी दयालुता और उसके मोहक संभाषणसे राजवीर आकर्षित हो रहा था। राजवीर को पता था की उसके आसपास जानेसे उसके लिए, और खुदके लिए भी खतरनाक हो सकता था, क्योंकि वह एक रक्तपिशाच था, उसका अस्तित्व ताजे रक्त पर निर्भर था, फिर चाहे वह रक्त जानवर का हो या फिर मानव का। इंसान के खून से उसे अधिक शक्ति प्राप्त होती थी , लेकिन वह अपने जैसे दुसरे रक्तपिशाचो की तरह मनुष्यों का शिकार नहीं करता था , क्योंकि उसे यह पसंद नहीं था, वह कोई भी पालतू जानवर या जंगली जानवर के खूनसेही अपनी प्यास बुझा लेता था । आर्या की सुंदरता और उसका व्यक्तित्व देखने के बाद, उसने महसूस किया था कि उसका जीवन शायद केवल रक्तपान के लिए नहीं, बल्कि जीवन किसी अच्छे कारण के लिए भी वह व्यतीत कर सकता था, उसका भी घर संसार हो सकता था।

राजवीर को अपने पिशाच होने का शापित बोझ हमेशा महसूस होता था। उसने पिछली तीन सौ शताब्दियों में कई लोगों को खो दिया था, दोस्त, परिवार और एक महिला भी, जिससे वह प्यार करता था। उसकी अमरताने उसे केवल उदासी और अकेलापन ही दिया था। आर्याको देखने के बाद , उसने खुदनेहीं सोचा था कि वह आर्या के दिल में कभीभी अपनी जगह नहीं बना पायेगा।

लेकिन फिर भी, उसका अस्तित्व उसके लिए एक नई आशा बन गया था। उसके चेहरे की साधारण मुस्कान, और उसके शब्दों में जो दयालुता थी, वह उसे फिर से जीने की इच्छा दे रही थी। राजवीर का दिल उसे बता रहा था कि आर्या के रूप में, उसके जीवन में प्रकाश की एक किरण आ सकती है, जो उसके अंधेरे अस्तित्व को आशा का एक छोटासा पल दे सकती है।

खिरसु के लोग राजवीर को ज्यादा नहीं जानते थे। राजवीर हमेशा चुपचाप रात के समय गाँव की सीमा से बाहर जाता था और सुबह गाँव के सिमा के पास वाले घर में आकर बैठ जाता था। गाँव के लोग उसे थोड़े संदेह के साथ देखते थे , क्योंकि उसका अकेला जीवन और अजीब व्यवहार उन सबके अपरिचित था। लेकिन उसका आकर्षक रूप और रहस्यमय व्यक्तित्व सारे लोगों को ज्यादा सोचने की अनुमति नहीं देता था।

आर्याने भी उसे एक बार देखा था। राजवीर गाँव के चौराहे पर इक शाम पुरानी किताबोके पत्तों को उलट रहा था। आर्या उससे बात करने रुकी नहीं, लेकिन उसके दिमाग में एक सवाल उठा, यह आदमी कौन है, जो हमेशा अकेला रहता है, और जिसकी आंखों में एक अलग दर्द दिखाई देता है?

राजवीर के दिमाग में भी कई विचार चल रहे थे। आर्या उसके लिए एक नई प्रेरणा थी, लेकिन अमरता का उसका शापित अस्तित्व आर्याको खतरे में डाल सकता था। फिर भी, वह अक्सर उसकी ओर आकर्षित होता था। आर्याके पास आतेही, उसे महसूस होता था, अगर वह मेरे जीवन में आ गयी तो मेरा जीवन बदल सकता है।

एक शाम, जब खिरसू के जंगल में राजवीर एकांत स्थान पर बैठा था, तब आर्या उसके करीब से चली गई । उसके हाथ में औषधि पौधों की एक टोकरी थी, उसके चेहरे की शांत अभिव्यक्ति राजवीर को मोहित कर गई। राजवीर उससे बात करना चाहता था, लेकिन वह रुक गया, क्योंकि वह जानता था कि वह केवल उसे अपने जीवन में लाकर सिर्फ चोट पहुंचा सकता है।

आर्याकी एक साधारण मुस्कान ने राजवीर को नई दिशा दी थी। राजवीरसे वह अभीभी बात करना तो दूर, आर्या उसे पहचानती भी नहीं थी, लेकिन राजवीर के आसपास उसका अस्तित्व राजवीर को अपने जीवन में रुचि रखने के लिए प्रेरित कर रहा था। राजवीर ने आखिरकार फैसला किया कि वह उसके साथ रहेगा, उसके संपर्क में आए बिना, जितना भी वह कर सकता है, वह उसके आसपास रहकर उसकी देखभाल करेगा, और वह उसके चारों ओरसे उसकी रक्षा भी करेगा।

एक जटिल जीवन में जीनेवाले राजवीर के जीवनमे आर्या एक आशा की किरण बनकर आई थी। खिरसू के ठन्डे कोहरे और गहरे वातावरणमें नई कहनीकी शुरुवात हो चुकी थी। जहां एक नरपिशाच और एक मानव लड़की का मिलन पूरी दुनिया को बदलने की शक्ति रखता था।

क्रमशः

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